Interesting Facts About Hanuman Chalisa and Hunuman Chalisa Lyrics

It is believed that Lord Shri Hanuman is still alive and in our midst. Worshiping Shri Hanuman Ji removes all the troubles. The one who always chants Shri Hanuman Chalisa gets his bad deeds done.

Shri Hanuman Chalisa was written by the great poet Goswami Tulsidas Ji. It is written in the Awadhi language.

It is said, reciting Shri Hanuman Chalisa 3 times, 7 times, 11 times, 21 times, 51 times or 108 times in a day will end your sorrows.

Interesting Facts About Hanuman Chalisa

  • A Chalisa is a collection of 40 Chaupai which is sung by Bhakt to praise the deed of deity with devotion.
  • Hanuman Chalisa was composed by Goswami Tulsi Das in the 16th century in the devotion of Hanuman Ji in a prison.
  • Tulsidas is acclaimed to be the reincarnation of Valmiki who composed the Ramayana. It is thus believed that the Hanuman Chalisa is written virtually by the same person who wrote Ramayana, although the two were written centuries apart from each other.
  • Some accounts claim that Tulsidas was imprisoned by Akbar in Fatehpur Sikri as Akbar asked Tulsi Das to make him see Rama by performing a miracle. Tulsi Das denied it and said, Rama, can only be seen by true devotion. After that Akbar put Tulsidas in a prison.
  • It is also claimed that, in the prison, Tulsidas created Hanuman Chalisa and chanted it for forty days, and on the 40th day, suddenly an army of monkeys descended upon the town and wreaked havoc in all corners of Fatehpur Sikri, entering each home and the Akbar’s harem, scratching people and throwing bricks from ramparts.
  • Hanuman Chalisa consists of 2 Doha (couplets) in the beginning, then 40 Chaupayi, and one couplet at the end.
  • It is believed that chanting Hanuman Chalisa removes negative vibrations. Many couplets in the Hanuman Chalisa are said to bring in the divine wisdom of Hanuman to his devotees and equip them to stay safe from negative energies and thoughts.
  • It is claimed that Hanuman Chalisa mentions the exact distance between the earth and the sun.

Hanuman Chalisa Lyrics Hindi

Shri Hanuman Chalisa Doha (श्री हनुमान चालीसा दोहा)

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार।
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार।।

Shri Hanuman Chalisa Chaupai (श्री हनुमान चालीसा चोपाई)

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥१॥

महाबीर विक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा कानन कुंडल कुँचित केसा ॥२॥

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे काँधे मूँज जनेऊ साजे
शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जगवंदन ॥३॥

विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मनबसिया ॥४॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर सँहारे रामचंद्र के काज सवाँरे ॥५॥

लाय सजीवन लखन जियाए श्री रघुबीर हरषि उर लाए
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई ॥६॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै अस कहि श्रीपति कंठ लगावै
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा ॥७॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते कवि कोविद कहि सके कहाँ ते
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥८॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना लंकेश्वर भये सब जग जाना
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू ॥९॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही जलधि लाँघि गए अचरज नाही
दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥१०॥

राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहू को डरना ॥११॥

आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हाँक ते काँपै
भूत पिशाच निकट नहि आवै महाबीर जब नाम सुनावै ॥१२॥

नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा
संकट ते हनुमान छुडावै मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥१३॥

सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै सोइ अमित जीवन फल पावै ॥१४॥

चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा
साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे ॥१५॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा ॥१६॥

तुम्हरे भजन राम को पावै जनम जनम के दुख बिसरावै
अंतकाल रघुवरपुर जाई जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥१७॥

और देवता चित्त ना धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई
संकट कटै मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥१८॥

जै जै जै हनुमान गुसाईँ कृपा करहु गुरु देव की नाई
जो सत बार पाठ कर कोई छूटहि बंदि महा सुख होई ॥१९॥

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥२०॥

Shir Hanuman Chalisa Doha (श्री हनुमान चालीसा दोहा)

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

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